Friday, 23 September 2016

R.O. का लगातार इस्तेमाल बन सकता है मौत का कारण

200 टीडीएस से कम का पानी मत पीओ। पर आजकल तो हर कोई RO को प्रोमोट करने में लगा है। यहां तक की डेंटिस्ट भी बिना जाने समझे अपने पेशेंट को सलाह दे देते हैं कि फ्लोराइड की वजह से आपके बच्चों के दांत खराब हो रहे हैं आप RO लगवाइए।

सच तो यह है कि न डॉक्टर को पता होता है न RO लगवाने वाले लोगों को पता होता है की RO आखिर करता क्या है। लोग तो बस स्टेटस सिम्बल समझकर या किसी और के घर में लगा देख कर अपने घर में लगवा लेते हैं।
विदेशों में पानी की बहुत किल्लत है। उनकी तकनीक से अब हमारे जल स्त्रोत भी दूषित होने लगे हैं। हम जो बारिश का पानी इकठ्ठा करके पूरा साल पीते थे, अपनी चावड़ी या कुएँ के जलस्तर सामान्य करने के लिए गाँवों में गहरे तालाब के पानी को सुरक्षित रखते थे हमने भंडारण तो बंद कर दिया, उसकी जगह पृथ्वी से जल का दोहन शुरू कर दिया।
R.O. का लगातार इस्तेमाल बन सकता है मौत का कारण :-
तेज गर्मी में शरीर को पानी की बहुत जरूरत होती है और RO का पानी मिल जाए तो क्या बात है, पर क्या हम कभी सोचते हैं की जो पानी शुद्ध दिख रहा है वो वाकई में शुद्ध है या नहीं? आप जान कर हैरान हो जाएंगे कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसे हानिकारक बताया है।
विश्व स्वास्थ्य संघठन यानी WHO ने बताया कि इसके लगातार इस्तेमाल करने से हृदय संबंधी विकार, थकान, कमजोरी, मांसपेशियों में ऐंठन, सिरदर्द आदि दुष्प्रभाव पाए गए हैं। कई शोधों के बाद पता चला कि ये पानी में कैल्शियम, मैग्नीशियम आदि को खत्म कर देता है जो कि शारीरिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
राजीव भाई कहते रहते थे की RO पानी की क्वालिटी को मैंटेन नहीं करता है, बल्कि मौजूद मिनरल्स को कम कर देता हैं इसलिए इसे अपने घरों में मत लगाओ।

आपके घर में अगर कोई सर्विस इंजीनियर आए तो उससे ये जरूर पूछना कि पीने के पानी मैं टीडीएस का स्तर कितना होना चाहिए तो वो आपको कहेंगे कि 50 टीडीएस का।
वैज्ञानिकों ने कहा कि मानव शरीर में 500 टीडीएस तक सहन करने की क्षमता होता है परन्तु RO 18 से 25 टीडीएस तक पानी को शुद्ध कर देता है जो बहुत ही ज्यादा हानिकारक है।
विकल्प के तौर पर क्लोरीन का इस्तेमाल हो सकता है जिसकी लागत भी कम होती है और आवश्यक मिनरल्स भी सुरक्षित रहते हैं जिससे शारीरिक विकास में कोई बाधा नहीं होती।
एशिया और यूरोप के कई देश R.O. पर प्रतिबंध लगा चुके हैं और दूसरी तरफ हमारे देश में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। कई विदेशी कंपनियों ने विज्ञापनों के द्वारा यहां पर अपना बहुत बड़ा बाज़ार जमा लिया है।

कई बोलतों का पानी चेक करने पर किसी में भी 20 टीडीएस का पानी नहीं मिला। न जाने क्यों मूर्ख लोग रसायन शास्त्री की सलाह मनाने के बजाय घर-घर घूमने वाले सेल्स्मेन की बातों में आकर अपना और अपने परिवार का जीवन दांव पर लगा रहे हैं।

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